उत्तर प्रदेश पश्चिम के बारे में

मेरठ

मेरठ भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में एक महानगर है | यह राष्ट्रीय राजधानी, नई दिल्ली के 70 किलोमीटर (43 मील) उत्तर –पूर्व में स्थित एक प्राचीन शहर है, और राज्य की राजधानी लखनऊ से 453 किलोमीटर उत्तर पश्चिम में स्थित है | यह भारत की राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा है । यह दिल्ली के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दूसरा विशालतम शहर है, भारत का सोलहवां बडा महानगर क्षेत्र है तथा भारत मे सत्रहवां विशालतम शहर है | यह दुनिया के सबसे बड़े शहरो और शहरी क्षेत्रो की सूची में 2006 में 292 तथा 2010 में 242 वे स्थान पर है । यह नोएडा के बाद उत्तर प्रदेश में दूसरा सबसे तेजी से विकसित हो रहा शहर है | यहाँ देश की दो सबसे बड़ी सैनिक छावनी है | 1857 की क्रांति को मंगल पांडे ने मेरठ से शुरू किया था | मेरठ जिला (जो एक ही नाम के राजस्व डिवीज़न का हिस्सा है) अपने मुख्यालय के शहर के नाम पर है और हिन्दुओं की पुरानी परम्परा के अनुसार इसकी स्थापना रावण के ससुर माया ने की थी इसलिए इसे मैदान्त का खेडा कहा जाता है एक दूसरे मत के अनुसार, माया नाम के वास्तुकार ने महाराज युधिष्ठर से यह भूमि प्राप्त की जिस पर इस समय मेरठ शहर स्थित है और इस स्थान को मैयराष्ट्र कहा गया और कालांतर में छोटा होकर मेरठ हो गया |

आगरा-ताज महल

यह दुनिया में सबसे खूबसूरत इमारतो में से एक है | 1631 में सम्राट शाहजहां ने अपने पत्नी मुमताज़ की याद में ताजमहल का निर्माण कराया | आगरा में सफ़ेद संगमरमर की समाधि एक महिला के लिए एक पुरुष के प्यार का स्मारक बन गया है |
जब शाहजहां 1622 में सत्ता में शासन करने के लिए आया तो उसने अपने दावे को सुनिश्चित करने के लिए अपने भाइयो की हत्या की और अपने पिता के सिहासन को जब्त कर लिया | वह एक असाधारण और क्रूर नेता के रूप में जाना जाता था | शाहजहां की पत्नी मुमताज़ ने अठारह वर्ष में 14 बच्चो को जन्म दिया और अंतिम बच्चे के जन्म के दौरान 39 साल की उम्र में मुमताज का निधन हो गया | शाहजहां ने उसकी स्मृति और उसकी उर्वरता के लिए एक स्मारक के रूप में ताजमहल का निर्माण किया | यह मकबरा उसकी योजना के तहत बनवाई गई सैकडो खूबसूरत इमारतो में से एक है जो शाहजहां ने ज्यादातर आगरा और दिल्ली में बनवाई |

मथुरा- जन्मभूमि

यह वह भूमि है जहाँ श्री कृष्ण पैदा हुए और अपना यौवन बिताया, वहाँ पर आज छोटा कस्बा बन गया है और वह बस्तियाँ (मजरे) आज भी कृष्ण महात्यम और बाँसुरी के संगीत से सुंगधित है। मथुरा, एक छोटा कस्बा है जो यमुना किनारे स्थित है, यह श्री कृष्ण के जन्म के बाद भक्ति स्थल में परिवर्तित हो गया । वृन्दावन , अपनी सुंगिन्धत कुंजों के लिये प्रसिद्ध है जहाँ पर श्री कृष्ण ने अपनी युवावस्था बिताई । अन्य बहुत सारे छोटे स्थान है जहाँ पर अब भी श्री कृष्ण के आकर्षण की प्रतिध्वनियाँ मौजूद है । ब्रजभूमि का केन्द्र मथुरा, दिल्ली से 145 किमी. दक्षिण-पूर्व में और आगरा से 58 किमी. उत्तर-पश्चिम में उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित हैं। ब्रजभूमि को दो अलग-अलग इकाईयो मे विभाजित किया जा सकता है । यमुना पथ के पूरब की ओर स्थित स्थान गोकुल, महावन, बलदेव, मट एंव बाजना और पश्चिम की ओर यमुना से घिरे मथुरा के अन्तर्गत वृन्दावन, गोवर्धन, कुसुम सरोवर, बरसाना और नन्दग्राम स्थित है।

फतेहपुर सीकरी

उपरी विंध्य पर्वतमाला रेंज एक विस्तृत प्राकृतिक झील के किनारे स्थित है जो अब ज्यादातर सूख गयी है। यहाँ प्रचुर मात्रा में जल, जंगल और कच्चे माल के साथ एक पूर्व ऐतिहासिक स्थल है और यह आदिम मानव की बस्ती के लिए आर्दश था। चित्रो के साथ चट्टानी आश्रय झील की परिधि पर मौजूद हैं। पाषाण युग के उपकरण इस क्षेत्र में पाए गए हैं । गेरु रंग के मिट्टी के बर्तनों (सी2 सहस्राब्दी ई.पू.) और रगींन धूसर बर्तनों (सी. 1200-800 ई.पू.) की भी खोज यहां से की गई है। दक्षिणमुखी स्मारकीय प्रवेश द्वार का निर्माण अकबर द्वारा कराया गया था, जैसा कि मस्जिद के मुख्य प्रवेश पर डक्कन पर 1601 मे विजय पर लगवायें गये शिला लेख में अंकित है। यह आज के सम्बन्ध में अकबर का शानदार वाकपटुता का प्रमाण है। यह 40.84 मीटर ऊंचा है और 13.52 मीटर ऊंचे एक मंच पर बनाया गया था। यह इस्लामी वास्तुकला का यह एक अच्छा उदाहरण है ।

नोएडा

न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण या साधरणतया नोएडा भारत में दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के करीब उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के भीतर स्थित एक एकीकृत टाउनशिप है। यह एक अद्वितीय शहर है जों कि आवासीय समस्या समाधान और औद्योगिक प्रसार के सामंजस्य का मिश्रण प्रदान करता है। ऩोएडा आधुनिक निर्माण की अवधारणा के लिए सतर्कतापूर्व बनाई गई योजना और उसके अनुपालन के एक परिणाम के रुप में जाना जाता है। यहाँ पर ढांचागत सुविधाओ जैसे कि वृक्षारोपण, हरित पट्टी और कई बगीचों एंव मैदानों के विकास के लिए सुरक्षित स्थान प्रदान किया गया। नोएडा शहर देश के अन्य बडे शहरों के विपरीत बिना कोई ट्रैफिक जाम और स्वच्छ वातावरण के साथ एक प्रदूषण मुक्त वातावरण का दावा करता है। इस शहर मे बिजली और सुरक्षित पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कोई कमी नहीं है जो इससे समीप शहरो एवं कस्बों के लिए लाभ प्रद है | नोएडा फिल्म सिटी का भी ठिकाना है।

हस्तिनापुर-

हस्तिनापुर कुरु वंश के राजाओ की राजधानी थी । महाकाव्य महाभारत में सभी घटनाये हस्तिनापुर के शहर में घटित हुई हैं। पुराणों में हस्तिनापुर के लिए पहला संदर्भ सम्राट भरत की राजधानी के रुप में आता है। सम्राट अशोक के पोते ने अपने साम्राज्य के दौरान यहां कई मंदिरो का निर्माण किया । प्राचीन मंदिर और स्तूप आज मौजूद नहीं है। हस्तिनापुर कि खुदाई में श्री बी बी लाल, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक द्वारा 1950 के दशक में की गयी। श्री लाल के द्बारा उल्लेख इस खुदाई का मुख्य उद्धेश्य है प्रारंभिक ऐतिहासिक काल के अन्य प्रसिद्ध चीनी मिट्टी उद्योगों के संदर्भ में रंगीन धूसर बर्तनों की स्तरीकृत स्थिति का पता लगाने के लिए किया गया था, श्री लाल ने महाभारत के लेख और हस्तिनापुर के अखोजित वस्तुओ के बीच सह-संबंध बनाने के दौरान अपनी खोज समाप्त की। खोज के दौरान उन्हें पाठ में वर्णित कुछ परम्पराओ के ऐतिहासिक कारण को प्रेरित किया साथ ही साथ ऊपरी गंगा बेसिन क्षेत्रों में आर्यो के आगमन के साथ रंगीन धूसर बर्तनों की उपस्थिति से जोडने के लिए उसका नेतृत्व किया । हस्तिनापुर के पूर्व इतिहास के सम्बंध में स्थिति स्पष्ट नही है। मध्यकालीन युग में हस्तिनापुर पर मुगल शासक बाबर द्वारा हमला किया गया था। ब्रिटिश शासनकाल में भारत में हस्तिनापुर में गुर्जर राजा नैन सिहं नागर का शासन था जिन्होंने हस्तिनापुर में आसपास के कई इलाको में मदिंरो का निर्माण कराया था |

सरधना-

मेरठ से 19 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में महान महिला बारीलीक का एक रोमन कैथोलिक चर्च है। इस चर्च का इतिहास है कि बेगम समरु को 1778 मे अपने पति की मृत्यु के बाद सरधना की जागीर विरासत में मिली थी जो उसने कुँवारी मैरी को समर्पित करके एक चर्च के निर्माण का निर्णय लिया। चर्च के निर्माण में 4 लाख रुपये खर्च हुए यह उन दिनों में एक बड़ी राशि थी । शीर्ष राजमिस्त्री 25 पैसे प्रतिदिन के बराबर और मजदूरों को शेल्स में भुगतान किया गया था। दो तिथियों को अक्सर चर्च की शुरुआत के लिए जाना जाता है। श्री के.एम. मुशीं, विख्यात इतिहासकार 1809 में प्रारम्भ की तिथि बताते है। चर्च के मुख्य द्बार पर एक लैटिन शिलालेख में 1822 अंकित होने के कारण कई लोग इस तिथि को मानने के इच्छुक हैं।

मेरठ में खेल

मेरठ खेल के सामान के विनिर्माण के लिए एक केन्द्र रहा है। यहाँ पर खेल के प्रसिद्ध सामानों के केन्द्र जैसे- बी.डी. महाजन एंड संस, एस एस, सचदेवा स्पोर्टस इत्यादि है जिसके परिणाम स्वरुप मेरठ को खेल एवं खेलो से सम्बंधित सामानों के विनिर्माण के नाम से भी जाना जाता है।

सहारनपुर - लकड़ी का कार्य

सहारनपुर (भारत) अपनी लकडी पर नक्काशी के काम के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है। मुगल काल में लगभग 400 साल पहले कुछ कारीगर कश्मीर से आये थे और सहारनपुर में बस गए और उन्होनें इसे रोजी-रोटी कमाने के रुप में इस काम को लिया । धीरे-धीरे इस कला को सहारनपुर में आम आदमी के बीच बढाया गया और अब लकडी के हस्तशिल्प का काम पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। लगभग 100,000 कारीगर, शिल्पकार एंव श्रमिक इस उद्योग में शामिल हैं। ये कारीगर, शिल्पकार एंव श्रमिक अपने अस्तिव के लिए रात-दिन कठिन कार्य कर रहें है।

मुरादाबाद - पीतल नगरी

मुरादाबाद सम्राट अकबर कें शासक के दौरान चौपाला परगना के लिए एक कार्यालय के रुप में स्थापित किया गया था। 1624 ई. में यह रुस्तम खान द्वारा अधिकृत कर लिया गया, जो उस समय सम्भल का शासक था। जिसने इस शहर को रुस्तमनगर का नाम दिया, बाद में 1625 ई. मे मुगल शासक शाहजहाँ के पुत्र शहजादे मुरादबख्स के नाम पर बदलकर मुरादाबाद हो गया । मुगल शासक के लिए रुस्तम खान ने शहर में एक मस्जिद का निर्माण कराया। यह शहर पीतलनगरी (ब्रास सिटी) के नाम से तथा हाथ से बनें पीतल सम्बंधी उद्योगो के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ उत्तर रेलवे का मण्डल कार्यालय भी है। मुरादाबाद एक बडा औद्योगिक शहर एंव निर्यात केन्द्र है। यहाँ के हाथ से बने सामानों का निर्यात भारत के कुल हाथ से बने सामानो के निर्यात का 45 प्रतिशत से अधिक है।
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